अररिया जिले के स्वास्थ्य विभाग ने सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों (एचडब्ल्यूसी) में तैनात एएनएम और अन्य मेडिकल स्टाफ के लिए डिजिटल बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली को अनिवार्य कर दिया है। यह निर्णय स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। जिला स्वास्थ्य समिति के अनुसार, यह व्यवस्था सभी उपकेंद्रों पर तत्काल प्रभाव से लागू की जाएगी।
जिले में कुल 285 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर संचालित हैं, जिनमें से अधिकांश दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। पहले इन केंद्रों पर उपस्थिति की निगरानी मैन्युअल रजिस्टर के माध्यम से होती थी, जिसमें देरी और अनुपस्थिति की शिकायतें आम थीं। नई बायोमेट्रिक प्रणाली से न केवल उपस्थिति की सटीक निगरानी होगी, बल्कि स्वास्थ्य कर्मियों की जवाबदेही भी बढ़ेगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक एएनएम और मेडिकल स्टाफ को अपनी उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीन से दर्ज करनी होगी, जो सीधे जिला मुख्यालय के सर्वर से जुड़ी होगी। इससे वास्तविक समय में उपस्थिति की निगरानी की जा सकेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अक्सर एएनएम के समय पर न पहुंचने के कारण उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पाता था, जिससे गर्भवती महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी होती थी। बायोमेट्रिक प्रणाली लागू होने से अब उम्मीद है कि स्वास्थ्य कर्मी समय पर उपलब्ध होंगे और ग्रामीणों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
जिला स्वास्थ्य पदाधिकारी ने बताया कि सभी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर बायोमेट्रिक मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं और कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई कर्मचारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाया गया तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता है और इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।